| हेग घोषणा | |
पर्यावरण के सम्बन्ध में हेग घोषणा 11 मार्च, 1989 को हेग में की गई और इस पर निम्न चौबीस देशों के प्रतिनिधियों ने हस्ताक्षर किएः आस्ट्रेलिया, ब्राजील, कनाडा, कोट डी 'आईवोइर, मिश्र, फ्रांस, जर्मनी संघीय गणराज्य, हंगरी, भारत, इण्डोनेशिया, इटली, जापान, जोर्डन, केन्या, माल्टा, नारवे, न्यूजीलैण्ड, नीदरलैण्ड्स, सेनेगल, स्पेन, स्वीडन, टूनीशिया, वेनेजुएला तथा जिम्बाब्वे। जीने का अधिकार एक ऐसा अधिकार है जिससे अन्य सभी अधिकार उत्पन्न होते हैं। इस अधिकार का आश्र्वासन देना विश्र्व में सभी देशों के प्रभारियों का सर्वोपरि दायित्व है। प्रमाणित वैज्ञानिक अध्ययनों ने विशेष रूप से वायुमण्डल के तापित हो जाने तथा ओजोन परत के अपकर्ष से जुड़े खतरों की मौजूदगी और संभावना व्यक्त की है। मौजूदा वैज्ञानिक ज्ञान के अनुसार इस घटनाक्रम के परिणाम पारिस्थितिकीय प्रणाली और कुल मिलाकर मनुष्य जाति के सर्वाधिक महत्वपूर्ण हितों को खतरे में डाल सकते हैं। क्योंकि इस समस्या का विस्तार ग्रह-व्यापी है इसलिए इसके समाधान केवल विश्र्व स्तर पर ही तैयार किए जा सकते हैं। वायुमण्डल को प्रभावित करने वाले अधिकांश निस्सरण आजकल औद्योगीकृत देशों में पाए जाते हैं और यही वे देश हैं जिनमें बदलाव की जरूरत सबसे अधिक हैं और यही वे देश हैं जिनके पास इस समस्या से प्रभावी रूप से निटपने के लिए सबसे अधिक संसाधन उपलब्ध हैं। अन्तर्राष्ट्रीय समुदाय और विशेष रूप से औद्योगीकृत देशों पर विकासशील देशों की, जोकि वायुमण्डल में बदलाव के कारण अत्यधिक नकारात्मक रूप से प्रभावित होंगे, मदद करने का विशेष दायित्व है हालांकि इस प्रक्रिया के लिए उनमें से अनेक का दायित्व आज की तारीख में बहुत मामूली हो सकता है। हेग घोषणा का पाठ निम्नानुसार हैः प्रत्येक देश के अन्तर्राष्ट्रीय दायित्वों पर कोई भी प्रतिकूल प्रभाव डाले बिना हस्ताक्षरकर्ता निम्न सिद्धान्त स्वीकार करते हैं और उन्हें बढ़ावा दें: (क) संयुक्त राष्ट्र के तंत्र के भीतर या तो मौजूदा संस्थानों का सुदृढ़ीकरण करके अथवा एक नया संस्थान बनाकर, एक नया संस्थानात्मक प्राधिकरण स्थापित करने का सिद्धान्त जोकि पृथ्वी के वायुमण्डल के संरक्षण के सन्दर्भ में वायुमण्डल के और आगे वैश्र्िवक तापन से संघर्ष करने के लिए जिम्मेदार होगा तथा उसमें निर्णय लेने की ऐसी क्रियाविधियां शामिल रहेंगी जोकि यदि किसी मौके पर सर्वसम्मत सहमति नहीं हुई है तो भी प्रभावी होंगी; (ख) इस आशय का सिद्धान्त कि यह संस्थानात्मक प्राधिकरण ऐसे जरूरी अध्ययन हाथ में लेगा या शुरू करेगा, जो तर्कोचित जानकारी हो सकता है--जिसमें अपेक्षित प्रौद्योगिकी की सुलभता को सुकर बनाना शामिल होगा--वायुमण्डल की सुरक्षा के संवर्धन अथवा गारंटी के लिए इन्स्टू्रमेंट्स निर्मित करना और मानक परिभाषित करना और उनके अनुपालन की मानीटरी करना; (ग) नए संस्थानात्मक प्राधिकरण के निर्णयों, ऐसे निर्णयों, जोकि अन्तर्राष्ट्रीय न्यायाधिकरण के नियंत्रण के अध्यधीन होंगे, के प्रभावी कार्यान्वयन तथा अनुपालन को बढ़ावा देने के लिए उपयुक्त उपायों का सिद्धान्त; (घ) इस आशय का सिद्धान्त कि वायुमण्डल के संरक्षण के निमित्त लिए गए निर्णय जिन देशों के लिए अन्य बातों के साथ-साथ उनके विकास के स्तर तथा वायुमण्डल के अपकर्ष की वास्तविक जिम्मेदारी को दृष्टिगत रखते हुए असाधारण या विशेष बोझ बनेंगे इस तरह के भार को वहन करने के निमित्त उनकी प्रतिपूर्ति करने के लिए बराबर की सहायता। इस प्रयोजन के लिए तंत्र विकसित किए जाने होंगे; (ड.) उपर्युक्त सिद्धान्तों के लिए संस्थानात्मक तथा वितीय रूप से एक प्रभावी और सुसंगत आधार प्रदान करने के आवश्यक कानूनी दस्तावेज सम्बन्धी बातचीत। जिन राज्यों तथा सरकार के अध्यक्षों अथवा जिनके प्रतिनिधियों ने इस घोषणा के नीचे अपने हस्ताक्षर करके इस घोषणा के प्रति अपना समर्थन व्यक्त किया है वे इस प्रकार परिभाषित सिद्धान्तों को निम्न द्वारा बढ़ावा देने का अपना संकल्प दोहराते हैं: · संयुक्त राष्ट्र के भीतर तथा संयुक्त राष्ट्र के तत्वावधान के अधीन मौजूदा एजेंसियों के निकट तालमेल और सहयोग से अपनी पहल को और आगे बढ़ाना; · विश्र्व के सभी देशों को तथा इस क्षेत्र में सक्षम अन्तर्राष्ट्रीय संगठनों को आईपीसीसी द्वारा अध्ययनों को ध्यान में रखते हुए, संस्थानात्मक प्राधिकरण के लिए जरूरी तंत्र परिपाटियां तथा अन्य कानूनी दस्तावेज तैयार करने वायुमण्डल के संरक्षण के लिए तथा जलवायु बदलाव विशेष रूप से वैश्र्िवक तापन का प्रतिकार करने के निमित्त ऊपर बताए गए अन्य सिद्धान्तों के कार्यान्वयन के लिए आमंत्रित करना। · विश्र्व के सभी देशों से तथा इस क्षेत्र में सक्षम अन्तर्राष्ट्रीय संगठनों से प्रकृति और पर्यावरण के संरक्षण से सम्बन्धित समझौतों पर हस्ताक्षर करने तथा उनकी संपुष्टि करने के लिए आग्रह करना; · विश्र्व के सभी देशों से मौजूदा घोषणा का समर्थन करने का आग्रह करना। |