तुंगभद्रा परियोजना को पूर्ण करने तथा इसके कार्य एवं अनुरक्षण के लिए आंध्र प्रदेश राज्य अधिनियम, 1953 की धारा 66 की उपधारा (4) के तहत निहित शक्तियों के प्रयोग द्वारा भारत के राष्ट्रपति ने तुंगभद्रा बोर्ड का गठन किया । बोर्ड सिंचाई, जल विद्युत उत्पादन तथा जलाशयों से अन्य प्रयोगों के लिए जल का विनियमन कर रहा है ।
बोर्ड में भारत सरकार द्वारा नियुक्त अध्यक्ष होता है तथा तीन सदस्य होते हैं, प्रत्येक आंध्र प्रदेश, कर्नाटक तथा भारत सरकार का प्रतिनिधित्व कर रहे हैं । अपने कार्यों को पूरा करने के लिए, बोर्ड राज्य सरकार की शक्तियों का प्रयोग करता है। अपने कार्य के संचालन के लिए यह स्वयं नियम बनाता है । आंध्र प्रदेश सरकार तथा कर्नाटक सरकार समान अनुपातों में निधि प्रदान करते है तथा समान अनुपातों के अनुसार अनेक पदों के लिए स्टॉफ भी नियुक्त करते हैं। राज्यों को पानी के नहरवार वितरण के लिए तुंगभद्रा बोर्ड द्वारा राज्य सरकारों से परामर्श करके प्रतिवर्ष कार्य तालिका तैयार की जाती है तथा जल वर्ष के दौरान समय-समय पर इसकी समीक्षा की जाती है। जल का विनियमन सहमत जल तालिका के अनुरूप किया जाता है ।
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