तदनन्तर जीडब्लयूपी एक ऐसी सामरिक कार्य-योजना तैयार करते हुए जोकि विश्र्व जल परिषद की विशेष भूमिका दर्शाएगी जल प्रबन्ध पर वैश्र्विक सर्वसम्मति और साथ ही परिषद द्वारा यथा प्रस्तुत विकल्पों को विकासशील देशों को क्षेत्र-आधारित सेवाओं के रूप में रूपान्तरित करेगी।
वैश्र्विक जल भागीदारी (जीडब्ल्यूपी) अगस्त 1996 में औपचारिक रूप से स्थापित की गई थी। जीडब्ल्यूपी का यह मानना है कि सतत मानव विकास के लिए संधारणीय जल का प्रबन्ध करने के निमित्त पानी के प्रतियोगी प्रयोगों को अनुकूलित करना जरूरी है। यह तभी हो सकता है जबकि ताजा पानी के लिए स्पर्धा करने वाले पक्षकार अपनी मांगों को समुचित रूप से समायोजित करने के पारस्परिक लक्ष्य के साझीदार बने और यह काम कैसे किया जाए--इस बारे में चर्चा में प्रवृत्त हों। इस लक्ष्य की पूर्ति का साधन एकीकृत जल संसाधन प्रबन्ध (आईडब्लयूआरएम) है और इसका उद्देश्य प्रमुख आर्थिक प्रणालियों के स्थायीत्व के बिना आर्थिक और सामाजिक कल्याण को अधिकतम करने के माध्यम से पानी, भूमि और सम्बन्धित संसाधनों का समन्वित विकास तथा प्रबन्ध सुनिश्चित करना है।
जीडब्ल्यूपी एक मुक्त नेटवर्क है जोकि जल संसाधन प्रबन्ध से जुडे सभी संगठनों: विकसित और विकासशील देशों के सरकारी संस्थानों, संयुक्त राष्ट्र की एजेंसियों, द्विपक्षीय तथा बहुपक्षीय विकास बैंकों, व्यावसायिक संघों, अनुसंधान संस्थानों, एनजीओ और निजी क्षेत्र के लिए खुला है। इस साझेदारी का वित्तपोषण विकासात्मक सहयोग एजेंसियों द्वारा किया जाता है और यही कारण है कि विकासशील देशों में प्रारम्भकि क्रियाकलाप जल मुद्दों पर केन्द्रित रहे हैं। नए औद्योगीकृत देशों की ओर 1998 में ध्यान दिया जाएगा और ऐसा माना गया है कि कुछ समय बाद विकसित देशों की तरफ ध्यान दिया जाएगा। एक सामरिक योजना, जिसमें अगले पांच से दस वर्षों के भीतर साझेदारी की उन्नति की कल्पना की गई है, वार्षिक समीक्षा और वितरण के लिए तैयार की गई है।
जीडब्ल्यूपी में अभिशासन के चार स्कन्ध हैं: परामर्शी समूह, संचालन समिति, तकनीकी सलाहकार समिति और सचिवालय/जीडब्ल्यूपी निम्न कार्य करेगीः
- सरकारों और मौजूदा नेटवर्कों के साथ सहयोग करके तथा नई सहयोगात्मक व्यवस्थाएं बनाकर एकीकृत जल संसाधन प्रबन्ध को सहयोग देना;
- सरकारों, सहायता एजेंसियों तथा अन्य दावाधारकों को संगत और पूरक नीतियों तथा कार्यक्रम अपनाने के लिए प्रोत्साहित करना;
- जानकारी और अनुभव के आदान-प्रदान के लिए तंत्रों का निर्माण और सुदृढ़ीकरण करना;
- एकीकृत जल संसाधन प्रबन्ध के निमित्त साझा समस्याओं के लिए नवीन और प्रभावी समाधान निर्मित करना;
- इन समाधानों पर आधारित व्यावहारिक नीतियां और उत्तम परिपाटियां सुझाना;
- आवश्यकताओं को उपलब्ध संसाधनों के अनुरूप बनाने में मदद करना।
एक ऐसे तंत्र की व्यवस्था करके जिसके माध्यम से दाता, निजी क्षेत्र और जल संसाधन व्यावसायिक जानकारी और आवश्यकताओं का आदान-प्रदान कर सकते हैं, बेहतर जल आधारिक तंत्र तथा इसके प्रबन्ध के लिए निवेश की संभावनाएं अधिक होती हैं। इस उद्देश्य के लिए जीडब्ल्यूपी ने दो विशिष्ट साधन अभिज्ञात किए हैं। दाता एजेंसियों के एक वित्तीय समर्थन समूह (एफएसजी) का गठन किया जा रहा है ताकि दाता एजेंसियां जल संसाधन प्रबन्ध के लिए जीडब्लयूपीटीएसी द्वारा यथा अभिज्ञात अन्तर्राष्ट्रीय प्राथमिकताओं के लिए अपने वित्तीय सहयोग को युक्तियुक्त बनाने के लिए मिलकर काम कर सकें। अन्य (द्विपक्षीय) जल संसाधन कार्यक्रमों को सहयोग देने के अपने मानदण्ड की बाबत दाताओं के बीच चर्चा का एक मंच उपलब्ध कराने के लिए भी एफएसजी मौजूद रहेंगे। एफएसजी की बैठक प्रतिवर्ष होगी और उनकी बैठकें सभी के लिए खुली होंगी; तथापि केवल दाता एजेंसियां भाग ले सकेंगी। व्यावसायिक आदान-प्रदान के लिए जीडब्लयूपी जल मंच एक अन्य प्रमुख साधन है। |