मार डेल प्लाटा, अर्जेन्टाइना में 1977 में आयोजित संयुक्त राष्ट्र प्रायोजित सम्मेलन, वैश्र् विक जल संसाधनों के प्रबन्ध में अन्तर्राष्ट्रीय सहयोग और समन्वय बढ़ाने की दिशा में पहला कदम था। एक अन्तर्राष्ट्रीय जल नीति संगठन की जरूरत की मान्यता 1980 के दशक में तथा 1990 के दशक के आरम्भ में उत्पन्न हुई और गहन हो गई।
डब्लिन तथा रियो में क्रमशः जल और पर्यावरण पर 1992 में आयोजित सम्मेलनों में इन सिद्धान्तों को समर्थन प्राप्त हुआ। जल और स्थायी विकास सम्बन्धी डब्लिन वक्तव्य और कार्यसूची 21 में बताए अनुसार वे इस बात पर बल देते हैं किः
· ताजा पानी एक सीमित और दुर्लभ संसाधन है जो जीवित रहने, विकास और पर्यावरण के लिए जरूरी है;
· जल विकास और प्रबन्धन एक सहभागितापूर्ण दृष्टिकोण पर, जिसमें सभी स्तरों पर प्रयोक्ताओं, योजनाकारों और नीति निर्माताओं को सहयोजित किया जाना चाहिए, आधारित होना चाहिए;
· पानी की व्यवस्था, प्रबन्ध और सुरक्षा में महिलाएं एक केन्द्रीय भूमिका निभाती हैं;
· पानी का इसके सभी प्रतियोगी प्रयोगों में एक आर्थिक मूल्य होता है और इसे एक आर्थिक पदार्थ के रूप में मान्यता दी जानी चाहिए।
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