पूर्वी नदियों पर
भाखड़ा नांगल और ब्यास परियोजना तथा इंदिरा गांधी नहर परियोजना (आंशिक रूप से पूरी की गई) के पूरा हो जाने के बाद भारत उसे आबंटित पूर्वी नदियों के औसतन लगभग 37 बीसीएम (30 एमएएफ) पानी का प्रयोग कर रहा है। इन्दिरा गांधी नहर परियोजना और सतलज-यमुना सम्पर्क नहर, जो अभी निर्माणाधीन हैं, के शेष हिस्सों के पूरा हो जाने के बाद शेष पानी का भी पूरा लाभ उठाया जाएगा। साथ ही पूर्वी नदियों पर 60% भार गुणांक पर 11,219 मेगावाट जल विद्युत क्षमता में से 3945 मेगावाट स्थापित क्षमता की परियोजनाएं पहले ही स्थापित की जा चुकी हैं और 4,144 मेगावाट स्थापित क्षमता की परियोजनाएं निर्माण की विविध अवस्थाओं में हैं।
पश्चिमी नदियों पर
क्योंकि भारत ने पश्चिमी नदियों पर कोई संरक्षण भण्डार निर्मित नहीं किया है इसलिए भारत प्रभावी तारीख को निर्धारित क्षेत्र के अलावा केवल 2,70,000 एकड़ के सीमित क्षेत्र के भीतर ही नदी प्रवाह से पानी लेकर सिंचाई विकसित कर सकता है। नीचे दिए गए विवरणों के अनुसार वर्ष 2003-2004 के दौरान भारत 9,12,477 एकड़ के अनुमत्य क्षेत्र में से 8,12,574 एकड़ क्षेत्र सिंचित कर सकता है।
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बेसिन |
प्रभावी तारीख को आईसीए ( एकड़) |
अतिरिक्त अनुमत्य आईसीए (एकड़) |
शुद्ध अनुमत्य आईसीए (एकड़) |
2003-2004 में प्राप्त कुल आईसीए (एकड़) |
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सिंधु |
42,179 |
70,000 |
1,12,179 |
50,766 |
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झेलम |
5,17,909 |
1,50,000 |
6,67,909 |
6,44,362 |
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चिनाब |
82,389 |
50,000 |
1,32,389 |
1,17,446 |
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योग 6,42,499 |
9,12,477 |
8,12,574 |
इसके अलावा पश्चिमी नदियों पर 60% भार गुणांक पर प्रत्याशित 8,769 मेगावाट के सन्दर्भ में लगभग 1,348 मेगावाट स्थापित क्षमता की परियोजनाएं पहले ही पूरी कर ली गई हैं तथा लगभग 1300 मेगावाट स्थापित क्षमता की परियोजनाएं निर्माण की विभन्नि अवस्थाओं में हैं। |