सिंधु जल संधि के दायित्वों की पूर्ति करते हुए भारत ने लघु संयंत्रों, नदी-प्रवाही-जल विद्युत घर और एक भण्डारण निर्माण कार्य सहित 27 हाइडल परियोजनाओं के सम्बन्ध में पाकिस्तान को अपेक्षित आंकड़े भेज दिए हैं। सिंधु बेसिन की नदियों के पानी के अन्तर्प्रवाह तथा उपयोग सम्बन्धी आंकड़ों का प्रतिमाह आदान-प्रदान किया जाता है। साथ ही भारत पश्चिमी तटों से सिंचित फसल क्षेत्र (आईसीए) के सम्बन्ध में 30 नवम्बर तक पाकिस्तान को आंकड़े भेजता है।
सिंधु जल संधि के प्रावधानों के अनुसार रावी, सतलज, ब्यास, जम्मू तवी, चिनाब और झेलम नदियों के बाढ़ प्रवाह 1962 से तार द्वारा पाकिस्तान को भेजे जा रहे हैं। साथ ही रावी, जम्मू तवी और चिनाब नदियों के बाढ़ प्रवाहों का 1974 से प्रसारण किया जा रहा है। बाद में पाकिस्तान के अनुरोध पर भारत और पाकिस्तान के सिंधु जल आयुक्तों के बीच 1989 में एक समझौते पर हस्ताक्षर किए गए हैं जिसके अनुसार प्रतिवर्ष 1 जुलाई से 10 अक्टूबर की अवधि के दौरान रावी और सतलज नदियों के बाढ़ प्रवाह टेलीफोन द्वारा पाकिस्तान को सूचित किए जाएंगे। उक्त प्रयोजन के लिए सिंधु स्कन्ध में एक नियंत्रण कक्ष चौबीसों घण्टे काम करता है। बाढ़ प्रवाह भेजने के लिए पाकिस्तान से कोई खर्चा नहीं लिया जा रहा हालांकि संधि में इस बात के लिए प्रावधान है। यह पाकिस्तान के प्रति केवल हमारे देश की सद्भावना का प्रतीक है। तथापि समझौते की हर वर्ष समीक्षा की जाती है। तथापि वर्ष 2001 से पाकिस्तान से यह कहा गया है कि वह डाटा के संप्रेषण के वास्तविक खर्च की प्रतिपूर्ति करे और मामले पर अ भी लिखा-पढ़ी ही हो रही है। |