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किसान सहभागिता कार्रवाई अनुसंधान कार्यक्रम

      भूजल के कृत्रिम पुनर्भरण संबंधी सलाहकार परिषद की 22 जुलाई, 2006 को नई दिल्ली में हुई पहली बैठक के उद्धाटन भाषण के दौरान माननीय प्रधानमंत्री ने उल्लेख किया 'हमें विज्ञान और प्रौद्योगिकी में निवेश करने के लिए अपने जल उपयोग को न्यूनतम करना है ताकि हम ऐसी फसलों को उगा सकें जिनमें जल का उपयोग कम हो । दूसरे शब्दों में जल की प्रत्येक बूंद से फसल के महत्व को रेखांकित करने के तरीके ढूंढ़ सकें ।' प्रधानमंत्री के सुझावों को कार्यान्वित करने के लिए परिषद ने 'जल की प्रत्येक बूंद से अधिक फसल और आय' संबंधी उपसमिति की सिफारिशों के अनुसार, किसान सहभागिता कार्रवाई अनुसंधान कार्यक्रम के कार्यान्वयन के लिए नीचे दिये गए ब्यौरे के अनुसार अनुमोदन किया है ।

 

      कृषि की उत्पादकता और लाभप्रदता को बढ़ाने के लिए शेल्फ में अब प्रौद्योगिकियों सहित उपलब्धता अवसरों की व्यापक जागरूकता सृजित करने के लिए देश भर में उपयुक्त कृषि विश्वविद्यालयों, आईसीएआर अनुसंधान संस्थानों, अर्ध्द-शुष्क ट्रोपिकों (उष्ण कटिबंधों) के लिए अंतर्राष्ट्रीय फसल अनुसंधान संस्थान (इक्रीसेट) और जल एवं भूमि प्रबंधन संस्थानों (वाल्मीस) की सहायता से 5000 किसान सहभागिता कार्रवाई अनुसंधान कार्यक्रम शुरू किए गए है । संस्थानों को विशेष रूप से मृदा में मैक्रो और माइक्रो न्यूट्रिएन्टस और कार्यान्वयन से संबंधित उपयुक्त प्रौद्योगिकियों, तकनीकों और कृषि पध्दतियों का उपयोग करते हुए जल की प्रत्येक बूंद से उत्पादन और आय में वृध्दि की संभावना के प्रदर्शन के लिए खेतिहर परिवारों के साथ संयुक्त रूप से कार्रवाई अनुसंधान कार्यक्रमों के आयोजन का दायित्व सौंपा गया है । प्रत्येक कार्यक्रम में न्यूनतम एक हेक्टेयर शामिल है और इसे कार्यक्रम के स्वामित्व भावना से खेतिहर परिवार के साथ सहभागिता पध्दति से कार्यान्वित किया जा रहा है ।

 

      जल संसाधन मंत्रालय ने 24.46 करोड़ रूपये की लागत से 60 संस्थानों द्वारा वर्ष 2007-08 में 5000 किसान सहभागिता कार्रवाई अनुसंधान कार्यक्रमों (एफपीएआरपीएस) का अनुमोदन किया है । विश्वविद्यालयों/संस्थानों ने देश के विभिन्न भागों में कार्यक्रमों का प्रदर्शन पहले ही शुरू कर दिया है । 14347 से अधिक किसान इन कार्यक्रमों में भाग ले रहे हैं । रबी के मौसम तक 980 प्रदर्शन पूरे कर लिये गए हैं और खरीफ के मौसम के अंत तक 3355 और प्रदर्शन पूरे कर लिये जाने की संभावना है ।

 

मंत्रालय ने सीडब्ल्यूसी और सीजीडब्ल्यूबी के क्षेत्रीय गठनों द्वारा मानीटर किए जा रहे इन कार्यक्रमों के लिए आवश्यक निधि जारी कर दी है । सभी कार्यक्रमों के पूरा होने पर वास्तविक और वित्तीय लाभों के संबंध में चयनित क्षेत्रीय संगठनों द्वारा मूल्यांकन करने का प्रस्ताव किया गया है ।

 

यह कार्यक्रम देश के 25 राज्यों/संघ राज्य क्षेत्रों में कार्यान्वित किया जा रहा है और 13500 से अधिक किसान इस कार्यक्रम में भाग ले रहे हैं । रबी के मौसम तक 967 प्रदर्शन पूर्ण हो गए हैं और खरीफ मौसम के अंत तक, 2353 प्रदर्शनों के पूरा हो जाने की संभावना है।

 

      इन कार्यक्रमों के कार्यान्वयन की प्रगति की मंत्रालय में समय-समय पर समीक्षा की जाती है ।

 

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