देश के भीतर अन्तर्देशीय जल मार्गों की कुल नौसंचालनयोग्य दूरी 15,783 किलोमीटर है जिसमें अधिकतम उत्तर प्रदेश में पड़ता है और उसके बाद क्रमशः पश्चिम बंगाल, आन्ध्र प्रदेश, असम, केरल और बिहार का स्थान आता है। नदी प्रणाली के बीच गंगा में सबसे अधिक लम्बा नौ-संचालनयोग्य जलमार्ग है जिसके बाद गोदावरी, ब्रह्मपुत्र तथा पश्चिम बंगाल की नदियों का स्थान आता है। भीतरी स्थानों तक पहुंचना जलमार्गों का एक अनूठा लाभ है। इसके अलावा वे कहीं कम प्रदूषण और कम संचार विषयक बाधाओं सहित यातायात के सस्ते साधन उपलब्ध कराते हैं। जलमार्ग यातायात का प्रयोग जो 1980-81 में 0.11 एमटी होता था वह 1994-95 में बढ़कर 0.33 एमटी तक पहुंच गया।
अन्तर्देशीय जल परिवहन का विकास ऊर्जा संरक्षण की दृष्टि से भीअत्यधिक महत्व का है। जिन दस जल मार्गों को राष्ट्रीय जलमार्ग घोषित किए जाने के लिए अभज्ञिात किया गया है, वे इस प्रकार हैं:
· गंगा-भगीरथ-हुगली;
· ब्रह्मपुत्र;
· माण्डवी, जुआरी नदी तथा गोवा में कुम्बराजुआ नहर;
· महानदी;
· गोदावरी;
· नर्मदा;
· सुन्दरवन क्षेत्र;
· कृष्णा;
· तापी; तथा
· पश्चिम तट नहर
गंगा-ब्रह्मपुत्र-हुगली तथा ब्रह्मपुत्र को पहले ही राष्ट्रीय जलमार्गों के रूप में घोषित किया जा चुका है। फरक्का नौ-संचालन जलपाश (लॉक) परिवहन के लिए खोला जा चुका है और इस प्रकार कलकत्ता से जुड़े हुए गंगा के प्रतिप्रवाह खण्डों के लिए परिवहन की सुविधा उपलब्ध हो गई है। राष्ट्रीय जलमार्गों के नेटवर्क के चलते इस क्षेत्र में 10 नदी प्रणालियों के जरिए सवारी और माल की ढुलाई में 35 एमटी प्रतिवर्ष की दर से वृद्धि होने की संभावना है। नौ-संचालन के लिए पानी का खपतकारी प्रयोग पर्याप्त नहीं है क्योंकि क्षय केवल अन्तिम भण्डारण परियोजनाओं पर होता है। |